महाभारत विराट पर्व – पांडवों का अज्ञातवास

महाभारत विराट पर्व – पांडवों का अज्ञातवास, महाभारत लेख में यह भाग 29 है । पिछले पोस्ट में हमने पड़ा कि किस तरह यमराज ने यमराज युधसिथिर से बहुत खुश हुए इसलिए उन्होंने सहदेव के साथ साथ भीम और अर्जुन को भी जीवित कर दिया । अगर आप भाग 28 पड़ना चाहते हैं तो आगे क्लिक करके पढ़ सकते हैं – यक्ष युधिष्ठिर संवाद, प्रश्न 1 – व्यक्ति का सच्चा साथी कौन

विराट पर्व

यमराज ने कहा कि कोई और वरदान मांगो तब युधिष्ठिर महराज ने यह वरदान माँगा कि वे क्रोध और लोभ से कभी ग्रसित न हों और अगर उनसे कोई दान मांगने आये तो वे दान देने में सक्षम हों । यमराज ने युधिष्ठिर महराज को यह वरदान भी दिया था कि अब वे चौसर में कभी नहीं हारेंगे ।

इसके बाद महाभारत में विराट पर्व शुरू हुआ । युधिष्ठिर महाराज ने कंक नाम के एक मंत्री का रूप बनाया । भीम वल्लभ नाम से एक रसोइये के रूप में रहने लगे । अर्जुन बृहन्नाला के रूप में एक हिजड़े के रूप में रहने लगे और उर्वशी के द्वारा मिला हुआ श्राप उन्होंने छुपने के लिए इस्तेमाल किया । अर्जुन बृहन्नाला के रूप में राजकुमारिओं को नाच गण सीखने लगे जो उन्होंने चित्रसेन गंदर्भ से स्वर्ग में सीखा हुआ था ।

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नकुल ग्रन्थिक के रूप में घोड़ों की सेवा करने लगीं । सहदेव तंत्रपाल के रूप में गायों की सेवा करने लगे । द्रोपदी सैरंध्री के रूप में रहने लगीं । इसके बाद पांडवों ने एक शामी नाम के बृक्ष में अपने हथियार छुपा दिए और पेड़ पर एक लाश टांग दी ताकि उसकी बदबू से वहां कोई पास न आये ।

रूप बदलने के बाद पांडव विराट नगर में गए और सबसे पहले युधिष्ठिर महराज विराट राज से कहा कि वे चौसर खेलने में बहुत माहिर हैं और सलाह भी बड़ी अछि देते हैं । इसके बाद भीम ने कहा कि वे बल्लभ हैं और वे एक साथ १०,००० लोगों का खाना बना सकते हैं । बाद में अर्जुन ने आकर कहा कि वे बृहन्नाला हैं और नाच गाने में माहिर हैं और राज की राजकुमारियों को नृत्य और संगीत सिखा सकते हैं ।

इसके बाद नकुल ने आकर कहा कि वे ग्रन्थिक हैं और राज के १०,००० घोड़ों को अकेले ही संभाल सकते हैं और सहदेव तंत्रपाल के रूप में गोशाला कि सेवा करने लगे । द्रोपदी सैरंध्री के रूप में रानी कि सेवा करने लगीं । एक बार रानी के भाई कीचक की नजर द्रोपदी पर पड़ी तो उसकी नजर खराब हो गयी तब द्रोपदी ने बताय कि उनके पांच पति हैं जो गंदर्भ हैं ।

जब कीचक ने जबरदस्ती करने की कोशिश की तब सैरंध्री राजा के पास दौड़ कर गयीं तब राजा ने दरोडी की मदद नहीं की क्यूंकि कीचक राज से ज्यादा शक्तिशाली था । भीम ने यह देख लिया और क्रोध से भर गए लेकिन युधिष्ठिर ने उन्हें रोक लिया । इसके बाद द्रोपदी रात के समय भीम के पास जाकर यह सब बात बताई । भीम ने द्रोपदी से कहा कि कीचक को कल अँधेरे में बुलाना ।

द्रोपदी ने कीचक से कहा कि वह नृत्यशाला में आ जाये । नृत्यशाला में बहुत ही ज्यादा अँधेरा था और वहां भीम एक चद्दर ओढ़ कर बैठे हुए थे । जैसे ही कीचक वह गया भीम और कीचक के बीच में युद्ध शुरू हो गया और भीम ने कीचक की बाजू तोड़ कर अलग कर दी ।

इसके बाद एक जोर का घूंसा मारा और कीचक के प्राण निकल गए । भीम ने मार मार कर कीचक के शरीर का मलीदा बना दिया । इसके बाद भीम ने द्रोपदी से कहा कि वे राजा से जाकर कह दें कि द्रोपदी के पति गंदर्भ आये थे और उन्होंने कीचक को मार दिया ।

जब सब लोग वहां आये तो वो लाश को देखकर पेचान नहीं पा रहे थे लेकिन उसने एक अंगूठी पहन राखी थी जिससे कीचक की पहचान हुयी । इसके बाद राजा ने कहा कि सैरंध्री को भी उसी अग्नि में दाल देंगे जिसमे कीचक एक अंतिम संस्कार करेंगे । बीच में भीम ने गन्दर्भों के कपडे पहने और जो कीचक की अर्थी लेकर जा रहे थे उनको बीच में ही मार दिया ।

इसके बाद विराट नरेश ने द्रोपदी से कहा कि व चली जाएं लेकिन सैरंध्री ने केवल 13 दिन रुक जाएं और राजा यह बात मान गया । पांडवों के अज्ञातवास में अब तक केवल 13 दिन ही बाकी रह गए थे । जब दुर्योधन को यह बात पता चली कि कीचक को किस तरह मारा गया है तो वह आश्चर्यचकित हो गया क्यूंकि कीचक दुर्योधन से भी ज्यादा शक्तिसाली था ।

दुर्योधन को पता चला कि कीचक को एक गंदर्भ ने मारा है तो उसने सोचा कि इस तरह गंदर्भ तो नहीं मारा करते । फिर दुर्योधन ने सोचा कि अगर वह गंदर्भ दुर्योधन की तरफ हो गया तो वह युद्ध में भीम को संभाल सकता है ।

दुर्योधन को यह भी शक था कि वह गंदर्भ भीम ही हो सकते हैं लेकिन उसने सोचा कि उसके दोनों हाथों में लड्डू हैं क्यूंकि अगर वह अज्ञातवास में पांडवों को ढूंढ़ लेता है तो उन्हें दोबारा से 12 वर्षों के लिए वनवास और 1 वर्ष के लिए अज्ञातवाश के लिए जान होगा ।

दुर्योधन की सेना में एक सुशर्मा नाम का व्यक्ति था उसने कहा कि विराट में केवल कीचक ही दमदार व्यक्ति था इसलिए अब विराट देश को जीत लेना चाहिए । विराट राज के पास ६०,००० गाय हैं उनको ले आना चाहिए ।

इससे आगे की कहानी आप आगे क्लिक करके पढ़ सकते हैं – महाभारत का विराट युद्ध

इसके बाद जब उत्तर ने वापिस विराट को जाकर बताया कि उसने साड़ी सेन को हरा दिया तो वे बहुत ज्यादा खुश हो गए । कंक के साथ जुआ खेलते समय विराट बार बार उत्तर की तारीफ कर रहे थे तब कंक ने कहा कि वह बृहन्नाला की वजह से ही जीता है कुयूंकि आपका बीटा तो कौरव सेना के एक साधारण सैनिक को भी नहीं हरा सकता है ।

तब विराट को क्रोध आ गया और उसने कंक ( युधिष्ठिर ) महाराज को जोर से मारा और उनके मुँह से खून आना शुरू हो गया । इसके बाद युधिष्ठिर महराज द्रोपदी से कहा कि वे एक वर्तन लाएं ताकि उनका खून वहां न गिर पाए । इसके बाद विराट ने उत्तर को बुलाया लेकिन युधिष्ठिर ने द्रोपदी से कहा कि अर्जुन को इस वक्त यहाँ ना आने दें ।

उत्तर ने वहां आकर सबकुछ सच सच बताना चाहता था लेकिन अर्जुन ने उसे मना किया हुआ था कि घर पर सबकुछ नहीं बताना । उत्तर ने बताया कि बृहन्नाला ने किसी गंदर्भ को बुला लिया था उसने सबको हरा दिया । विराट राज ने सोचा कि कोई भी गंदर्भ या देवता भीष्म पितामह को नहीं हरा सकता क्यूंकि भीष्म पितामह तो इंद्र तक को हरा दें ।

अगले दिन पांडवों ने अपने शाही कपडे पहने और विराट नरेश को अपना असली परिचय दिया । उन्होंने बताया कि जो आपके साथ चौसर खेला करते थे वे और कोई नहीं वे हैं पूरे विश्व के सम्राठ युधिष्ठिर महराज । बल्ल्भ असल में भीम हैं और इन्होने ही कीचक को मारा था ।

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