5 चीज़ें जो मृत्यु के बाद भी रहती हैं आपके साथ

मृत्यु के बाद भी सात जाती हैं ये पांच चीजें। मित्रो जैसा की हम सभी जानते हैं कि जिसने भी इस मृत्युलोक में जन्म लिया है उसकी एक न एक दिन मृत्यु अवश्य ही होनी है। और आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके कर्म को छोड़कर उसके साथ कुछ भी नहीं जाता। परन्तु ऐसा नहीं है। गरुड़ पुराण की मानें तो जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके मृत शरीर को जब जला दिया जाता है तब उस मृत आत्मा की यमलोक की यात्रा शुरू होती है और इस रास्ते में उसके कर्म के साथ साथ और भी जीवनकाल में की गई चार चीजें साथ जाती हैं। यानि मृत्यु के बाद मृत आदमी के साथ पांच चीजें हमेशा उसके साथ रहती हैं और जब उस आत्मा का पुनर्जन्म होता है तो ये पाँच चीजें उचित समय आने पर आत्मा के साथ फिर नए शरीर में प्रविष्ट हो जाती हैं।

पांच चीजें क्या हैं जो मृत्यु के बाद भी इंसान का पीछा नहीं छोड़ती

तो चलिए जानते हैं कि वो पांच चीजें क्या हैं जो मृत्यु के बाद भी इंसान का पीछा नहीं छोड़ती। नमस्कार, दर्शकों द डिवाइन टेल्स पर आपका एक बार फिर से स्वागत है। गरुण पुराण में जिन पांच चीजों का उल्लेख किया गया है उसमें सबसे पहला है कामना कामना। गरुड़ पुराण की माने तो पुनर्जन्म के समय कामना मनुष्य और दूसरे जीवों को फिर से नए शरीर को धारण करने में सहयोग करती है। कामना के अनुसार ही मनुष्य को नए शरीर की प्राप्ति होती है। अर्थात मृत्यु के समय मनुष्य जिन जिन चीजों की कामना करता है उसके साथ मृत्यु के बाद भी चली जाती हैं और उसी कामना की पूर्ति हेतु उस मृत आत्मा को फिर से किसी न किसी शरीर का

रूप लेकर लौटना पड़ता है। इसलिए गरुड़ पुराण में कहा गया है कि मृत्यु करीब आने पर सब चीजों की इच्छा त्याग करके केवल ब्रह्म अर्थात परमेश्वर का ध्यान करना चाहिए। अगर कामना लिए चले गए तो फिर नए शरीर में लौटना पड़ेगा। कामना के बाद जो चीजें मनुष्य के साथ जाती हैं वह हैं वासना। गरुड़ पुराण का मानना है कि कामना वासना का ही साथी है। वासना एक ऐसी चीज़ है जिसका कोई अंत नहीं है। मृत्यु शैया पर भी मृत आत्मा वासना से मुक्त नहीं हो पाती है। अब सवाल उठता है कि वासना क्या है? तो मित्रो, आपको बता दूं कि सांसारिक सुख की चाहत ही वासना है। जबकि ज्यादातर लोग वासना को केवल शारीरिक इच्छा की पूर्ति मात्र समझते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। गरुड़ पुराण के अनुसार जो मनुष्य मरते समय भी अपने जीवनसाथी, बच्चों, परिवारजनों के बारे में सोचता रहता है, साथ ही उनसे मिलने वाले सुख दुख को सोचता रहता है और अधूरी चाहतों को लेकर छटपटाता रहता है। इसी छटपटाहट में उसके प्राण निकल जाते हैं।

गरुड़ पुराण में इससे जुड़ी एक कथा का वर्णन किया गया है

गरुड़ पुराण में इससे जुड़ी एक कथा का भी वर्णन किया गया है, जिसके अनुसार राजा भारत की चाहत एक प्यारे हिरण के बच्चे में थी। उसे सोचते हुए राजा के प्राण निकल गए। जिसके परिणाम स्वरूप अगले जन्म में राजा भरत को स्वयं हिरण के रूप में जन्म लेना पड़ा। इसलिए कामना और वासना को मृत्यु के करीब आने पर मन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। नहीं तो मृत्यु के समय आप जो भी चीज की इच्छा लिए प्राण त्यागते हैं, अगला जन्म उसी योनि में होना निश्चित है। वासना के बाद जो चीजें मृत्यु के बाद भी इंसान के साथ बनी रहती हैं, वह उसके द्वारा जीवन भर किए जाने वाला कर्म। गरुड़ पुराण का मानना है कि मनुष्य जीवन भर कर्म करता है, चाहे वह कर्म अच्छा हो या बुरा हो। वह मृत्यु के बाद उसके साथ सदैव बना हुआ रहता है। गीता में भी कहा गया है कि कोई भी मनुष्य बिना कर्म किए एक पल भी नहीं रह सकता। मृत्यु करीब आने पर आत्मा शरीर द्वारा किए गए कर्मों की स्मृति को समेट लेती है। यह कर्म ही मनुष्य को परलोक में सुख और दुख देते हैं और इन्हीं के परिणाम से अगले जन्म में अच्छा बुरा फल प्राप्त होता है। श्री कृष्ण की माने तो कर्म की गति तो ऐसी है कि सात जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ती है।

जिसका सबसे अच्छा उदाहरण महाभारत में मिलता है। वाणों की शैया पर लेटे हुए भीष्म ने जब श्री कृष्ण से पूछा कि मुझे ऐसी मृत्यु क्यों प्राप्त हुई तो श्री कृष्ण ने उन्हें 101 जन्म पूर्व की घटना याद दिलाते हुए कहा कि 101 जन्म पूर्व आपके कारण एक क्रिकेटर की मृत्यु ऐसे ही हुई थी इसलिए आज आप वाणों की शैया पर पड़े हुए हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह जीवन में अच्छे कर्म करे ताकि उसे दूसरे जन्म में उसके कर्मों का अच्छा फल मिल सके। कर्म के बाद गरुण पुराण में कर्ज का वर्णन किया गया है जिसके अनुसार इंसान को चाहिए कि यदि वह जीवित रहते किसी से कर्ज ले तो उसे मरने से पहले जरूर चुका देना चाहिए। क्योंकि लिया गया कर्ज और दिया गया कर्ज दोनों ही जन्म जन्मांतर तक पीछा नहीं छोड़ता है। गरुण पुराण में बताया गया है कि कर्ज लेकर मरने पर कर्ज दाता जब परलोक में आता है तो अपना कर्ज का धन वापस मांगता है। उस समय यम के दूत कर्ज लेकर मरने वाले का मांस काट कर कर्जदाता को देता। है, लेकिन कर्ज का बोझ यहीं नहीं उतरता।

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आपके द्वारा किया गया दान परोपकार का पुण्य कई जन्मों तक साथ चलता है

अगले जनम में भी कर्ज पीछा करता है और उसे किसी न किसी रूप में चुकाना पड़ता है। इसलिए मित्रो यदि आपने कभी किसी से कर्ज लिया हो तो उसे मरने से पहले अवश्य ही चुका दें ताकि अगले जन्म में आपको किसी तरह का कष्ट न उठाना पड़े। कर्ज के बाद जिस पांचवीं चीज के बारे में बताया गया है वह है पुण्य जो मृत्यु के बाद भी मृत आत्मा के साथ यमलोक से लेकर दूसरे जन्म तक बनी रहती है। पुणे। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आपके द्वारा किया गया दान परोपकार का पुण्य कई जन्मों तक साथ चलता है। जीवन में जब कोई अपरिचित आपकी गरुड़ मदद करे तो यह समझ लीजिए कि वह आपके पूर्व जन्म का पुण्य चुका गया है। शास्त्रों में दान पुण्य को बैंक में रखे धन की तरह कहा गया है, जो बुरे वक्त में समय समय पर काम आता है। इसलिए मनुष्य को पूर्ण रूप धन को जीवन भर जमा करते रहना चाहिए। अक्षय तृतीया, अक्षय नवमी, माघ पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, गंगा दशहरा, मकर संक्रांति कुछ ऐसे दिन हैं जिनमें किया गया दान पुण्य कई जन्मों तक व्यक्ति को सुख देता है और ये पुण्य जन्मों जन्मों तक आपके साथ बना रहता है। इसलिए मित्रों मनुष्य रूपी जीवन में गरुड़ पुराण में बताए गए इन सभी चीजों का खास ध्यान रखें ताकि मृत्यु के बाद आपको सद्गति की प्राप्ति हो। तो मित्रो उम्मीद करता हूँ कि आपको हमारी ये कथा पसंद आई होगी।

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