सत्यवती और ऋषि पराशर की अनसुनी कहानी

महाभारत में कौरव और पांडव के बीच युद्ध होने की कई कारणों का उल्लेख मिलता है। सभी लोग अपने हिसाब से युद्ध के कारणों की व्याख्या भी करते हैं। मैं आपको महाभारत का एक ऐसा प्रसंग बताने जा रहा हूं जिसे जाने के बाद आप भी कहेंगे ना होता तो शायद महाभारत जी नमस्कार आप सभी के लिए हैं। अगर आप महाभारत की कथा पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे। हिंदी में एक कहावत है कि पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय हिंदी की कहावत भारत के संदर्भ में कही जाए तो कोई गलत नहीं होगा। कथा के अनुसार द्वापर युग में पराशर नाम के एक ऋषि हुआ करते थे जो बहुत ही विद्वान और योग सिद्धि संपन्न एक प्रसिद्ध ऋषि थी।

कहा जाता है कि ऋषि पराशर एक दिन जमुना पार करने के लिए नाव पर सवार हुए। उस दिन बुधवार की जगह उसकी पुत्री सत्यवती चला रही थी। विशाल पुत्री सत्यवती दिखने में बहुत ही सुंदर थी। ऋषि पराशर उसको देखकर मोहित हो गए और उन्होंने नीम करने की इच्छा जताई साफ मना कर दिया और कहा कि यह तो धर्म के विरुद्ध है। विवाह से पहले मैं ऐसा अनैतिक काम नहीं करूंगी। लेकिन ऋषि पराशर कहां मानने वाले थे। उनसे बार बार निवेदन करने लगे। अंत में सत्यवती ऋषि पराशर से संबंध बनाने को तैयार हुई लेकिन सत्यवती ने भी।किसी के सामने तीन शर्ते रख दी। ऐसा करते हुए कोई नहीं देखे। ऐसे में तुरंत ही ऋषि पराशर ने बना दिया, जहां तीसरा कोई नहीं था।

दूसरी किसी भी हालत में ने आश्वासन दिया कि कमाया पहले जैसी हो जाएगी। उसकी मछली जैसी दुर्गंध बदल जाए। उसकी सारी दुर्गंध गायब कर दी और सत्यवती से एक मनमोहक सुगंध आने लगी। शर्तों को पूरा करने के बाद सत्यवती ने ऋषि पराशर से संबंध बनाएं। सत्यवती ने एक पुत्र को जन्म दिया गिरी पुत्र आगे चलकर महर्षि वेदव्यास के नाम से प्रसिद्ध हुआ और यही निषाद पुत्री।आगे चलकर हस्तिनापुर नरेश शांतनु की रानी बनी सत्यवती के कारण ही पुत्र देवव्रत को आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा लेनी पड़ती व्रत का तब से नाम भीष्म हो गया।

आगे चलकर राजा शांतनु के सत्यवती से चित्रांगद और विचित्रवीर्य नामक दो पुत्र हुए। चित्रांगद के बड़े होने पर उन्हें हस्तिनापुर का राजा बनाया गया। विचित्रवीर्य अपनी दोनों रानियों के साथ भोग विलास में रत हो गए किंतु दोनों ही राज्यों से उनकी कोई संतान नहीं हुई। पीलिया रोग से पीड़ित होने के कारण मृत्यु को प्राप्त हो गई। तब माता सत्यवती ने अपने पहले पुत्र वेदव्यास को बुलाया, राष्ट्र पांडु और विदुर का जन्म हुआ। इस तरह से मारा जा सकता है। यदि सत्यवती और ऋषि पराशर के बीच में अनैतिक संबंध नहीं बनता तो महाभारत की कथा कुछ और ही होती। अगर आपको यह वीडियो पसंद आई हो तो लाइक और शेयर जरूर करें। सब्सक्राइब करें द डिवाइन टेल्स यूट्यूब चैनल को और वीडियोस के लिए अब हमें इजाजत दीजिए। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।

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