महाभारत काल्पनिक नही सत्य है मिले है पक्के सबूत !

साबित करते हैं कि महाभारत काल्पनिक नहीं सत्य है। धर्म और आस्था एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहां धर्म की बात होती है। वहां आस्था खुद ब खुद आ जाती है। के सबसे बड़े ग्रंथ महाभारत के साथ भी कुछ ऐसा ही है। श्री कृष्ण भगवान और गीता भी इसी से जुड़े हैं। गीता में लिखे शब्दों को हिंदू धर्म का मार्गदर्शक कहा जाता है और महाभारत को धर्म और अधर्म के बीच हुए सबसे बड़े युद्ध उस वक्त के मिले कुछ प्रमाण यह साबित करते हैं कि श्रीकृष्ण ने इस धरती पर जन्म लिया था और महाभारत का युद्ध भी हुआ था।

महाभारत को भारत का इतिहास कहा जाता है। इतिहास का मतलब होता है जो घटित हुआ हो। अगर यह कोई काल्पनिक घटना होती है तो इसे लिखने वाले इसे महाकाव्य के बजाय कथा कहते ना कि इसे घटना कहा जाता। महाभारत की शुरुआत राजा मनु से होती है और इस वंश के 50 से ज्यादा राजाओं के किस्से इसमें लिखे हैं। राजा पांडु और धृतराष्ट्र भी इसी वंश के वंशज हैं। अगर कोई घटना होती तो इसके लेखक पूरे वर्ष के बारे में लिखने के बजाय सिर्फ पांच से 10 राजाओं के बारे में ही लिखते। कहता है कि श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश महाभारत युद्ध के दौरान दिया था, जिसमें कलयुग यानी कि आज के वक्त की कहानी का सारा बखान है। आज हो रहा है। वह गीता में पहले से लिखा है।

यह कोई काल्पनिक घटना नहीं हो सकती। श्री कृष्ण द्वारका के राजा थे और महाभारत के अनुसार यह शहर जलमग्न हो गया था। पुरातत्व विभाग के अनुसार गुजरात के पास समुद्र के नीचे एक पूरा शहर मिला है। इसे महाभारत काल का ही बताया जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण की नगरी को एक संपूर्ण राज बताया जाता है द्वारका के बारे में।है कि वह रहने वालों को छोड़कर समुद्र ने इस पूरे शहर को अपने अंदर समा लिया था। समुद्र में मिले अवशेष यह साबित करते हैं कि वह शहर ही कृष्ण का द्वारका है। महाभारत में भारत के पैसे से ज्यादा शहरों के बारे में लिखा है जो आज भी हमारे बीच मौजूद है। पुरातत्व विभाग को इस बात के कई प्रमाण भी मिल चुके हैं। भारत और उसके आसपास के कई देशों का महाभारत हस्तिनापुर आज उत्तर प्रदेश राज्य का मेरठ जिला है। वह गांधार आज अफगानिस्तान शहर का काम धाम है।

77 इंद्रप्रस्थ आज भारत की राजधानी दिल्ली है और श्री कृष्ण का द्वारका भी आज गुजरात राज्य का एक शहर है। रामायण और महाभारत दो अलग-अलग वक्त में दो अलग-अलग लोगों के द्वारा लिखी गई हैं और दोनों में किताबों में लिखी गई बातों में कई प्रमाण मिले हैं। अगर यह किताबे काल्पनिक होती तो इन दोनों किताबों में इतनी समानताएं मिलना नामुमकिन है। इतिहास के पन्ने में चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में लिखा गया है।हे भगवान श्री कृष्ण वंश के 138 से राजा थे। चंद्रगुप्त मौर्य के होने की सच्चाई को तो सब मानते हैं तो ऐसे में श्रीकृष्ण के होने का भी यह एक प्रमाण है। दुष्यंत और शकुंतला के बेटे भरत के नाम पर भारत देश का नाम पड़ा और भरत के वंश का विवरण महाभारत मे है।

पांडु और धृतराष्ट्र इन्हीं के वंशज है। भारत देश का ही महाभारत का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह बोलना कि महाभारत कोई काल्पनिक घटना है। बिल्कुल गलत होगा क्योंकि इस लिखी हरप्रसाद सही है। यहां तक कि इसमें लिखे गणित के सिद्धांत काव्य के रूप में है। सो प्रतिशत सही है। पुराणों में मौर्य काल का विवरण है। साथ ही ग्रीस के इतिहास का विवरण पुराणों में लिखा है जो कि सच है। महाभारत के बारे में पुराणों में लिखा है जो इनके होने का प्रमाण देते हैं। कहां से आता है कि महाभारत के युद्ध में कई शक्तिशाली हथियारों का प्रयोग हुआ था जिसमें परमाणु बम भी थे।

उनकी ताकत थी और धरती के खात्मे की क्षमता पहले संस्कृत के विद्वान को यह बात समझ नहीं आई थी। लेकिन जापान पर हुए परमाणु हमले ने इस बात के भी राज खोल दिए। पहले परमाणु बम का इस्तेमाल करने वाले ओपन हेमंत से जब एक छात्र ने पूछा कि आपको पहला परमाणु बम इस्तेमाल करके कैसा लगा तो उन्होंने कहा कि आज के समय का पहला परमाणु बम इस्तेमाल कर वे मानते थे कि महाभारत काल में भारत के पास यह शक्ति थी। महाभारत के एक महत्वपूर्ण पात्र जरासंध थे, जिसका वध भीम के हाथों हुआ। जरासंध बगैर देश के राजा थे। पुरातत्व विभाग को बिहार के 1 जिले में राजगीर में जरासंध का अखाड़ा मिला है। जहां भीम ने उसे मौत के घाट उतारा था। आज पाठकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। कुंती के सबसे बड़े पुत्र कौन अंग्रेज के राजा थे जिसे तोहफे के रुप में दुर्योधन ने कर्ण को दे दिया था

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