मरते वक़्त रावण ने लक्ष्मण को बताई थी ये बड़े काम की 3 बातें

आज के एपिसोड में हम बात करेंगे। मरते वक्त रावण ने लक्ष्मण को कौन सी तीन अहम बातें बताई थी। हम जब तक सामाजिक रूप से प्रमाणित अच्छे कार्य करते जाते हैं, तब तक समाज भी हमारी प्रशंसा करता है। लेकिन जैसे ही समाज के विरुद्ध एक बुरा काम किया नहीं कि हम सदा के लिए बुराई का पात्र बन जाते हैं। लंकापति रावण के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

शिवजी जानते थे कि रावण एक राक्षस है और अपने स्वार्थ के लिए तब कर रहा है लेकिन रावण की भक्ति पूर्ण तपस्या को भी दरकिनार ना कर सके और विवश होकर उन्हें रावण को वरदान देना ही पड़ा कहते हैं जैसे ही भगवान शिव ने रावण को वरदान दिया। उसके साथ भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम के जन्म के फैसले को भी ले लिया गया। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अनुसार माता के कई की इच्छा के मुताबिक श्री राम उनकी पत्नी सीता एवं अनुज लक्ष्मण को 14 वर्षों के लिए वनवास अयोध्या छोड़कर जाना पड़ा।

और फिर भी समय आया जब रावण भूमि पर लेटे हुए अपनी अंतिम सांस का इंतजार कर रहा था तब श्रीराम ने अनुरक्षण को बुलाया और कहा, रावण के पास जाकर उनसे सफलता के जीवन के अनमोल मंत्र ले लो। यह बात सुनकर पहले तो अनुज लक्ष्मण को श्री नाम की बात पर कुछ संदेह हुआ। वह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिरकार एक दुश्मन से सफलता का क्या पाठ मिलेगा। लेकिन जिस मेहता के आदेश को लक्ष्मण नकार नहीं सकते थे और आखिरकार में रावण के सिर के पास जाकर खड़े हो गए।

रावण काफी कठिन हालत में स्वास्थ्य ले रहा था और सिर के पास खड़ा। लक्ष्मण उसे काफी ध्यान से देख रहा।और प्रतीक्षा कर रहा था कि कब है कुछ बोलें, लेकिन रावण ने अपने मुख से एक शब्द भी ना कहा और निराश होकर लक्ष्मण अपने भाई श्री राम के पास लौट गए और कहा रावण तो कुछ कह ही नहीं रहे तब श्रीराम मुस्कुराए और बोले जब हमें किसी से शिक्षा प्राप्त करनी हो तो कभी भी उसके सर के पास खड़े नहीं होना चाहिए। जाओ। रावण के चरणों के पास जाकर हाथ जोड़कर प्रार्थना करो। वह तो मैं सफलता की कुंजी अवश्य प्रदान करेंगे। श्री राम के वचन सुनकर लक्ष्मण को अचंभा हुआ, लेकिन आज्ञा अनुसार उसने ठीक वैसा ही किया जैसा प्रभु चाहते थे। वह राक्षस राजा रावण के चरणों के समीप गया।

हाथ जोड़े और आग्रह किया कि रावण ने सफल जीवन के मंत्र प्रदान करें। उस समय रावण ने अपने मुख से कुछ वचन बोले और उन्हें सफल जीवन की तीन मूल्यवान बातें बताएं।पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह यह थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना चाहिए। सुबह शीघ्रम और अशोक को जितना डाल सको डाल देना चाहिए। रावण ने लक्ष्मण को बताया कि मैं श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देर कर दी। इसी कारण मेरी यह हालत हुई। इसके बाद राम ने लक्ष्मण को दूसरी बात बताई। वह और भी हैरान कर देने वाली है। उसने कहा, अपने प्रतिद्वंदी अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा मत समझना।

वह आप से भी अधिक बलशाली हो सकते हैं। मैंने श्री राम को तुच्छ मनुष्य समझा और सोचा कि उन्हें हराना मेरे लिए काफी हाउस आसान होगा। लेकिन यही मेरी सबसे बड़ी भूल थी। रावण ने आगे कहा, मैंने जितने साधारण वानर और भालू समझा। उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दिया। मैंने जब ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा बदला कर सके। ऐसा कहा था क्योंकि मैं मनुष्य वानर को कुछ समझता था। यही मेरी भूल थी। रावण ने लक्ष्मण को तीसरी और अंतिम बात यह बताइए कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज चलता था। अगर उसे मैं या ना बताता तो शायद आज मेरी यह हालत ना होती तो दोस्तों कैसी लगी। आपको यह तीन अनमोल बातें हम उम्मीद करते हैं कि आप इन सभी बातों को अपने जीवन में भी अमल जरूर करेंगे और हमें कमेंट करके बताएं कि कैसी लगी।

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