प्राचीन भारत में इस्तेमाल हुए ब्रह्मास्त्र के पुष्ट सबूत

आज हम आपको बताएंगे ब्रह्मास्त्र के बारे में महाभारत सिर्फ योद्धाओं की गाथाओं तक सीमित नहीं है। महाभारत की कई घटनाओं में संबंध और ज्ञान-विज्ञान के रहस्य छिपे हुए हैं। महाभारत से जुड़े श्राप, वचन और आशीर्वाद सभी में रहस्य छिपे हैं। इन्हीं रहस्यों में से एक है। ब्रह्मास्त्र जो संभवत दुनिया का पहला परमाणु बम था। ब्रह्मास्त्र धर्म और सत्य को बनाए रखने के उद्देश्य से निर्माता ब्रह्मा द्वारा निर्मित हथियार था। ब्रह्मास्त्र एक परमाणु हथियार है जिसे भी हथियार कहा गया है। माना जाता है कि यह अचूक और सबसे भयंकर अस्त्र ब्रह्मास्त्र सभी देवी हथियारों में श्रेष्ठ है और इसे केवल एक दूसरा ब्रह्मास्त्र ही रोक सकता है।

जो व्यक्ति इस अस्त्र को छोड़ता है, वही इसे वापस लेने की क्षमता भी रखता। लेकिन अश्वथामा को वापस लेने का तरीका नहीं जाता जिसके परिणाम स्वरूप लाखों लोग मारे गए। रामायण में मेघनाथ से युद्ध हेतु लक्ष्मण ने जब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना चाहा जब श्रीराम ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि अभी इसका प्रयोग उचित नहीं क्योंकि इससे पूरी लंका साफ हो जाएगी। रामायण और महाभारत काल में गिने-चुने योद्धाओं के पास ही थे। रामायण काल में यहां यह अस्त्र विभीषण और लक्ष्मण के पास था। वही महाभारत काल में यह द्रोणाचार्य अश्वत्थामा कृष्ण युधिष्ठिर करण प्रद्युमन और अर्जुन के पास था। ऐसा भी कहा गया है कि अर्जुन को यह अस्त्र इंद्र ने भेज दिया। ब्रह्मास्त्र कई प्रकार के होते हैं।

छोटे-बड़े और व्यापक रूप से संग आरक माना जाता है कि दो ब्रह्मास्त्र ओं के आपस में टकराने से पहले की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। समस्त पृथ्वी के समाप्त होने का भय रहता है। आधुनिक काल में जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर गीता और महाभारत का गहन अध्ययन किया। अमेरिका ने डॉक्टर ओपन हैमर की टीम को परमाणु बम पर अध्ययन करने का काम दिया था। उन्होंने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संघार अक्षमता पर शोध किया और अपने मिशन को नाम दिया। ट्रिनिटी रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 के बीच अमेरिकी विज्ञान। एक टीम ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया।धमाके का परिणाम कुछ वैसा ही था जैसा पौराणिक ग्रंथों में ब्रह्मास्त्र के इस्तेमाल से बताया गया है कि मानव जाति के इतिहास में सबसे बड़ा परमाणु विस्फोट था। धरती हिल गई।

चारों तरफ हवा में धूल और बजरी फैल गई। पक्षी पागल होकर इधर-उधर उड़ने लगे और धमाकों के बाद की घटनाएं जैसे जीवित मनुष्य के नाखूनों और बालों का गिरना बिल्कुल वैसा ही था। जैसा महाभारत काल में वर्णित है कि उसके बाद विदेशी वैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तव में महाभारत में ब्रह्माणु बनकर प्रयोग हुआ था। 42 साल पहले पुणे के डॉक्टर व लेखक पद्माकर विष्णु वर्तक ने अपने शोध कार्य के आधार पर कहा था कि महाभारत के समय जो ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल किया गया था, वह परमाणु बम के समान ही था। टॉवर तक की एक किताब स्वयंभू में इसका उल्लेख मिलता है। वेद पुराणों आदि में वर्णन मिलता है कि जगत पिता भगवान ब्रह्मा ने देशों के नाश हेतु ब्रह्मास्त्र की उत्पत्ति की ब्रह्मास्त्र का अर्थ होता है। ब्रह्मास्त्र प्राचीन काल में शत्रुओं से ज्यादा संग आरक होते थे। अस्त्र-शस्त्र दो धातुओं से निर्मित होते थे।

लेकिन अस्त्र को निर्मित करने की विद्या अलग ही प्रारंभ में ब्रह्मास्त्र देवी और देवताओं के पास ही हुआ करता था। प्रत्येक देवी दे। गांव के पास उनकी विशेषता के अनुसार अस्त्र होता था। देवताओं ने सबसे पहले गंधर्व को इस अस्त्र को प्रदान किया। बाद में यह इंसानों ने हासिल किया। प्रतीक शस्त्र पर भिन्न-भिन्न देव या देवी का अधिकार होता है और मंत्र तंत्र यंत्र के द्वारा उसका संचालन होता ब्रह्मास्त्र अचूक अस्त्र है जो शत्रु का नाश करके ही छोड़ता है। इसका प्रतिकार दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही हो सकता है। अन्यथा नहीं महर्षि वेदव्यास लिखते हैं कि जहां ब्रह्मास्त्र छोड़ा जाता है वहां 12 वर्षों तक जीव-जंतु पेड़-पौधे आदि की उत्पत्ति नहीं हो पाती। महाभारत में उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मास्त्र के कारण गांव में रहने वाली स्त्रियों के गर्म मारे गए। गौरतलब है कि हिरोशिमा में रेडिएशन फॉल आउट होने के कारण मारे गए थे और उस इलाके में 12 वर्ष तक अकाल रहा।

मोहनजोदड़ो हड़प्पा में हुई हालिया खोजें। ऐसे कई नगर मिले हैं जो लगभग 5000 से 7000 साल ईसा पूर्व स्थिति में थे। इन नगरों में मिले नर कंकालों की तिथि से ज्ञात होता है कि मानो इन्हें किसी अचानक पर हाथ से मारा गया है। इसके भी सबूत मिले हैं कि यहां किसी समय भयंकर गर्मी उत्पन्न हुई थी। इन नर कंकालों का अध्ययन करने से पता चला कि इन पर रेडिएशन का असर भी था।दूसरी और शोधकर्ताओं के अनुसार राजस्थान में जोधपुर से पश्चिम दिशा में लगभग 10 मील की दूरी पर 3 वर्ग मील का ऐसा क्षेत्र है जहां पर रेडियोएक्टिविटी की राख की मोटी परत जमी है। इस परत को देखकर उसके पास एक प्राचीन नगर को खोज निकाला गया, जिसके समस्त भवन और लगभग 500000 निवासी से लगभग 8000 से 12000 साल पूर्व किसी विस्फोट के कारण नष्ट हो गए थे। मुंबई से उत्तर दिशा में लगभग 400 किलोमीटर दूरी पर स्थित लगभग 21 मीटर की परिधि वाला एक विशालकाय गड्ढा मिला है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसकी आयु लगभग 50000 वर्ष है। इस गड्ढे के शोध से पता चला कि प्राचीन काल में भारत में परमाणु युद्ध हुआ था। आप क्या सोचते हैं क्या ब्रह्मास्त्र पौराणिक ग्रंथों की कहानियां नहीं बल्कि वास्तव में सच है।

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