पार्वती और शिव के विवाह की कथा

आज हम लेकर आए हैं कहानी शिव विवाह शिव विवाह कोई साधारण विवाह नहीं था। प्रेम समर्पण और तब की परिणति था। शिव विवाह दुनिया की बड़ी से बड़ी लव स्टोरी इस कहानी के आगे फेल है। जितनी नाटकीय था और उतार-चढ़ाव इस प्रेम कहानी में है। वह दुनिया की सबसे बड़ी हिट रोमांटिक फिल्म में भी नहीं होंगी। एक जन्म कि नहीं पार्वती पिछले जन्म में भी शिव की पत्नी थी तब उनका नाम सती था और वह प्रजापति दक्ष की बेटी थी। परम प्रतापी राजा दक्ष ने जानबूझकर अपने दामाद शिव को अपमानित किया।

जिस से आहत होकर सती हवन कुंड में कूद गई। सती के वियोग में शिव ने विरक्ति का भाग भर दिया और वह तपस्या में लीन हो गए। उधर शिव को फिर से हासिल करने के लिए सती ने पार्वती बनकर हिमालय के घर में जन्म लिया। देवताओं ने शिव का ध्यान भंग करने के लिए जब कामदेव को भेजा तो शिव ने उन्हें भस्म कर दिया, लेकिन पार्वती ने शिव को प्राप्त करने के लिए तब जारी रखा। आखिरकार बाबा भोलेनाथ को भी करना पड़ा और वे नंदी पर सवार होकर नंगे बदन पर भभूत मले बड़े।

ठाठ से बारात लेकर आए भारतीयों की शक्ल में थे। नाचते गाते गन यानी अनगिनत भूत पिशाच दुनिया के तमाम पशु पक्षियों को लेकर कीड़े मकोड़े तक इस बारात में नुमाइंदगी कर रहे थे। फिर वह पशुपतिनाथ यानी समस्त पशुओं के देवता शिव का विवाह जो था। शिवजी से विवाह करके पार्वती उनके साथ कैलाश चली गई।इस तरह 2 जन्मों से चल रही एक प्रेम कहानी कि हैप्पी एंडिंग में उदारता दुनिया के किसी और देवी देवता में विरल है। शिव को आशुतोष कहते हैं। यानी तुरंत प्रसन्न हो जाने वाला जब भी कोई राक्षस तपस्या में जुड़ता था, इंद्र के कान खड़े हो जाते थे।

देवराज बाकी देवताओं के साथ मिलकर बकायदा यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि भोलेनाथ किसी राक्षस को वरदान ना दे, लेकिन देने के मामले में शिव ने कभी भेद नहीं किया। वक्त चाहे ईश्वर हो या राक्षस जिस ने मांगा उसे मिला चाहे वह भस्मासुर ही क्यों ना हो। अमृत औरों को बांटा और विश खुद पी गए। बल्ला कहां होगा। पूरी दुनिया में ऐसा कोई दूसरा सामूहिक का शिव का एक और गुण है जो बहुत कम देवी देवताओं में जय महाकाल हर हर महादेव ओम नमः शिवाय।

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