परशुराम का श्राप बना कर्ण की मौत का कारण

एक बार फिर आपका स्वागत है दोस्तों आज के एपिसोड में हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों परेशान ने कर्ण को श्राप दिया था। बचपन से ही अद्वितीय प्रतिभाओं के स्वामी करण को धनुर्विद्या में विशेष रूचि थी और अपनी इस सूची के साथ में एक बार गुरु द्रोणाचार्य के पास पहुंचा परंतु द्रोणाचार्य नहीं है। बोलकर मना कर दिया कि मैं एक राजगुरु हूं और केवल राजकुमारों को ही शिक्षा प्रदान कर सकता हूं। करके पुनः विनती करने पर गुरु द्रोण ने कहा कि सूत पुत्र का कार्य साथी बनना है।

अस्त्र शस्त्र चलाना नहीं करण को गुरु द्रोण के ऐसे शब्द सुनकर क्रोध आया और उसने प्रतिज्ञा ली कि वह ब्रह्मांड के सर्वश्रेष्ठ गुरु से शिक्षा प्राप्त करेगा और द्रोणाचार्य के शिष्यों से भी बेहतर धनुर्धर बनेगा सरपंच। करण की भी भगवान परशुराम से हुई क्योंकि करण भगवान परशुराम से धनुर्विद्या सीखना चाहता था। उसने अपना परिचय एक ब्राह्मण के रूप में दिया क्योंकि परशुराम केवल ब्राह्मणों को ही अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करते थे। परशुराम ने कर्ण को अपना शिष्य बना लिया और अपनी सारी विद्या करण को दी।

एक दिन परशुराम और करंट जंगल जा रहे थे। थकान होने के कारण परशुराम रास्ते में ही विश्राम करने के लिए रुके रुके विश्राम में कोई खलल ना पड़े। इस कारण करने परशुराम का सर अपनी गोद में रखने के लिए कहा। विश्राम के मध्य में एक हीरा करण की जांग पर काटने लगा, परंतु कर्ण परशुराम की मुद्रा को भांग नहीं करना चाहता था। इसलिए उसी मुद्रा में बैठकर दर्द सहन करता रहा। कीड़े काटते हुए उसकी जान ले बहुत गहरा घाव कर दिया। जिस कारण रक्त बहने लगा। धीरे-धीरे रक्त की धार परशुराम के शरीर तक पहुंची और उनकी नींद खुल गई।

परशुराम ने देखा कि उनके आसपास बहुत।उन्होंने पूछा, यह किसका रक्त है करने पूरी बात करी सोनम को बताई तो परशुराम ने कहा, तुम ब्राह्मण नहीं हो सकते। कीड़े के घाव करने पर भी तुम बिना हिले डुले बैठे रहे। ऐसा तो केवल एक क्षत्रिय ही कर सकता है। बताओ तुम कौन हो तब कर ने बताया कि वह एक संयुक्त पुत्र हैं। तब तक परशुराम को ज्ञात हो चुका था कि कल एक क्षत्रिय ही झूठ हटाने के कारण परशुराम ने क्रोधित होकर कहा कि तुमने छल से विद्या प्राप्त की है। तुम्हारा वध भी छल से ही होगा और मेरे द्वारा सिखाई गई विद्या की जब तुम्हें सबसे अधिक आवश्यकता होगी। उस समय तुम सारी विद्या भूल जाओगे तो दोस्तों यह कारण था कि भगवान परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया। आशा है।

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