तिरुपति बालाजी के आश्चर्यचकित करने वाले रहस्य

भगवान में आस्था रखने वाले भारतीयों के अनगिनत सपनों में से एक है। तिरुपति बालाजी के दर्शन अनेक लोग तो वर्ष में कम से कम एक बार तिरुपति बालाजी के दर्शन करते हैं। परंतु जो जीवन की परिस्थितियों के कारण बाध्य हैं कि जीवन में कम से कम एक बार दर्शन की कामना करते हैं। मित्रों यदि आप भी तिरुपति बालाजी के दर्शन की चेष्टा रखते हैं तो यह आपके लिए ही समर्पित है जो आपको बताएगा।

इस मंदिर के अनेक रहस्यमई तथा रोचक तथ्यों के विषय में दिल से आप आज तक अनभिज्ञ थे। पहला तिरुमाला आंध्र प्रदेश में स्थित बालाजी में अर्पित पुष्पों को ना देखने की मान्यता है। मंदिर में जाकर ध्यान देने वाली बात है कि पुजारीपुट को पीछे की ओर देखते रहते हैं और फिर उसको को कभी नहीं देखते। दूसरा तिरुपति बालाजी मंदिर में स्थापित बालाजी के विग्रह पर पचाई कारपूराम अर्पित किया जाता है क्योंकि कपूर से मिलकर बनाए क्लिप है। विशेष बात यह है कि इसलिए को किसी और पत्थर पर लगाने से पत्थर चटक जाता है, परंतु बालाजी के विग्रह पर ऐसा कोई प्रभाव नहीं देखा गया है।

तीसरा बृहस्पतिवार के दिवस बालाजी के विग्रह पर सफेद रंग का लेप लगाया जाता है। कहा जाता है कि लेप को हटाने के पश्चात विक्रय पर लक्ष्मी जी के चिन्ह मिलते हैं। चौथा तिरुपति बालाजी मंदिर में एक दीपक बिना घी या तेल के अनेक वर्षों से जलता रहा है आज तक।को यह नहीं ज्ञात है कि यह दीपक कब और किसने प्रज्ज्वलित किया था। भाजपा अर्पित तुलसी तथा पुष्प भक्तों को नहीं दिए जाते बल्कि उन्हें कोई में डाल दिया जाता है। छटा बालाजी के दर्शन जब गर्भ ग्रह से किए जाते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि विग्रह गर्भ गृह के मध्य में स्थित है। परंतु बाहर से प्रतीत होता है कि विग्रह दाई और स्थित है। साथ में कहा जाता है कि बालाजी के विग्रह पर जो बाल है, वह वास्तविक है। यह बाल हमेशा मुलायम तथा सुलझी हुए रहते हैं। मान्यता है कि यहां पर भगवान स्वयं विराजते हैं। मित्रों अपना समय देने के लिए धन्यवाद कृपया हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें और रूबरू होते रहिए।

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