छठी इंद्री कैसे जागृत करें, गारंटी है बदल जाएगी आपकी दुनिया

छठी इंद्री यानी सिक्स्थ सेंस के बारे में आपने अक्सर पढ़ा तथा सुना होगा। लेकिन यह हमारे शरीर में कहां स्थित है और क्यों महत्वपूर्ण है इसे जानना भी आवश्यक है। मित्रो क्या आपने कभी गहनता से विचार किया है कि हमारे पास ऐसा कुछ है जो हमें बेहद कुशल, ब्रिलियेंट तथा एकाग्र बना सकता है? कुछ ऐसा जिसके जरिए आप अपना भूत, काल, भविष्य यहां तक कि दूसरों के मन को भी पढ़ सकते हैं।

क्या आपको पता है कि आप स्वयं ही अपने आपको आनेवाली विपत्तियों से बचा सकते हैं? जी हां, आपका सिक्स्थ सेंस आपको ऐसी अविश्वसनीय शक्तियां प्रदान करता है, जब हमें भगवान ने ऐसा शरीर दिया है, जो सबकुछ करने में समर्थ है। तो हम क्यों अपनी शक्तियों का उपयोग नहीं करते? क्यों हम अपनी छठी इंद्री को जागृत करने का प्रयास नहीं करते?

आज आप जिन कार्यों में व्यस्त हैं। छठी इंद्री जागृत करने के बाद आपके वह काम बहुत ज्यादा आसान हो सकते हैं। फिर चाहे वह धन कमाना हो या किसी परीक्षा को पास करना या किसी प्रतियोगिता में अव्वल आना। आइए आज जानते हैं कि कैसे करें अपनी छठी इंद्री को जागृत।

प्राणायाम का निरंतर अभ्यास आपके माता पिता या घर के बुजुर्गों ने बचपन से ही प्राणायाम का महत्व तो अवश्य बताया होगा। छठी इंद्री को जागृत करने की प्रक्रिया में प्राणायाम एक चमत्कारी अभ्यास है। पहले जानते हैं कि छठी इंद्री कहां पर स्थित है। आपके मस्तिष्क में कपाल के नीचे ब्रह्मरंध्र नामक एक छिद्र है। यहीं से सुषुम्ना नामक रीढ़ से यहीं से सुषुम्ना नाड़ी रीढ़ से होती हुई मूलाधार चक्र तक जाती है। सुषुम्ना सहस्त्र कार्य से जुड़ी हुई है। शरीर के बाईं तरफ इड़ा नाड़ी स्थित है तथा दायीं ओर पिंगला नाड़ी और इन्हीं दो नाड़ियों के मध्य स्थित है। आपकी छठी इंद्री याद रहे कि शरीर के चक्र पिंगला या इड़ा नाड़ी आदि सटल बॉडी या लिंग शरीर का भाग हैं। लिंग, शरीर अथवा सूक्ष्म शरीर जो माइंड, इंटेलिजेंस तथा इंटेलेक्ट का स्थान है। सुषुम्ना नाड़ी को जागृत करके सिक्स्थ सेंस को जागृत किया जा सकता है। प्राणायाम के अभ्यास से छठी इंद्री को मात्र छह माह में जागृत किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि प्राणायाम के वक्त श्वास प्रक्रिया गौड़ है और नाक के दोनों स्वर चलते हैं तथा इस समय सुषुम्ना नाड़ी सक्रिय होती है और सुषुम्ना नाड़ी की सक्रियता का। छठी इंद्री के जागृत होने से सीधा संबंध है। इड़ा, पिंगला तथा सुषुम्ना की शुद्धि तथा सशक्तिकरण केवल प्राणायाम तथा योग के द्वारा ही संभव है। इसलिए प्राणायाम करते वक्त महर्षि पतंजलि द्वारा बताए गए राज योग के आठ अंगों में से दो यम तथा नियम का पालन करना बहुत आवश्यक है।

यम नियम का पालन सीधे आपको गंतव्य स्थान पर ही ले जाकर छोड़ता है। अनुलोम विलोम प्राणायाम छठी इंद्री को जागृत करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि आप ऐसा स्थान चुनें जहां प्रदूषण रहित वातावरण हो। यदि ऐसा करना असंभव भी है तो भी प्राणायाम का अभ्यास बिल्कुल भी न छोड़ें। ध्यान लगाना यह तो आप मानते ही है कि हमारे ऋषि मुनि हमारी तुलना में कई गुना कुशल तथा बुद्धिमान थे। इसका सीधा सा कारण है उनका ध्यान की स्थिति में रहना। दूर से दर्शन तथा श्रवण जैसी शक्तियां काल्पनिक नहीं बल्कि पूरी तरह से वास्तविक हैं। हमारे ऋषि मुनि ध्यान के द्वारा छठी इंद्री को जागृत करके ही एक दूसरे के मन की बात समझ लेते थे। समाचार का संप्रेषण इसी विद्या द्वारा किया जाता था। प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास छठी इंद्री को जागृत करने में अत्यंत सहायक है। जब यह व्यवहार आपमें समाहित हो जाएगा तो आपके पास जीवन को सराहने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। मित्रों, यह सत्य है कि हमारे मस्तिष्क में न चाहते हुए भी अनेकों विचार भ्रमण करते रहते हैं। कहीं न कहीं यह अनावश्यक विचार हमारे शरीर तथा मस्तिष्क को स्थिर एवं दुर्बल बनाते हैं। ध्यान लगाने की पूरी प्रक्रिया में मौन से लेकर साधना तक आप ऐसी स्थिति को प्राप्त करते हैं जो छठी इंद्री को जागृत करती है। आत्म सम्मोहन की प्रक्रिया। सम्मोहन विद्या जिसे त्रिकाल विद्या या प्राण विद्या के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन काल की सर्वश्रेष्ठ विद्या है। अंग्रेजी में सम्मोहन को हिप्नोटिज्म भी कहते हैं। सम्मोहन मन की वह अवस्था होती है जिसमें शरीर की इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं अथवा चेतन मन तंद्रा या नींद की अवस्था में होता है।

सम्मोहन के समय चेतन मन स्वतः ही नींद की अवस्था में चला जाता है और अर्धचेतन मन जागृत होता है। मन की अनेक अवस्थाएं होती हैं। इनमें से एक है आदिम चेतन मन, जिसका संबंध सूक्ष्म शरीर या लिंग शरीर से होता है। आदिम चेतन मन न तो कोई विचार करता है और न ही कोई निर्णय लेता है। यह मन आपको पूर्वाभास कराने में सहायक है। उदाहरणतया यदि आप बीमार होने वाले हैं तो यह आपको पहले से ही सूचित कर देगा। इसे ही कहते हैं सिक्स्थ सेंस। आदिम आत्म चेतन मन की साधना ही आत्म सम्मोहन कहलाती है। सेल्फ हिप्नोटिज्म की सबसे सरल विधि है प्राणायाम और ध्यान से प्रत्याहार को साधने की विधि। आत्म सम्मोहन को साधने के बाद आपका मन पूर्णतया स्थिर होगा। इंद्रियां सशक्त होंगी एवं मन एक ही दिशा में कार्य करेगा। मित्रो यह एक ऐसा अनुभव है जिसे एक साधारण व्यक्ति कभी अनुभव नहीं कर सकता। प्रतिदिन प्रातः तथा संध्या के समय प्राणायाम एवं ध्यान करने से आत्म सम्मोहन को साधा जा सकता है।

सिक्स्थ सेंस को जागृत करने की इनके अलावा और भी विधियां हैं जैसे त्राटक विधि। लेकिन यह बिना किसी की सहायता के करने से घातक भी सिद्ध हो सकती हैं। मित्रों सिक्स्थ सेंस जागृत करने से यदि आप पर कोई नजर रख रहा है या हानि पहुंचाने वाला है तो आप पहले से ही जानकर सावधानी बरत सकते हैं। जिन लोगों को तुरंत निर्णय लेना होता है जैसे सैनिक, फायर ब्रिगेड, खिलाड़ी।

ऐसे लोगों की छठी इंद्री साधारण व्यक्तियों की तुलना में अधिक जागृत होती है। आप भी बताए गए अभ्यासों के द्वारा इस क्षमता को विकसित करें तथा अपनी छठी इंद्री को जागृत करें। विश्वास कीजिए आम लोगों के लिए आप एक चमत्कारी व्यक्ति होंगे।

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