गाय भारत में एक पवित्र पशु क्यों है?

एक मुहावरा तो सब ने सुना होगा। होलिका जिस का हिंदी में अनुवाद है। पवित्र गाय गाय हिंदुओं के लिए एक पवित्र पशु है। भारत के लगभग हर शहर हर गांव हर कस्बे में गाय खुलेआम घूमती जरूर दिख जाएगी। पर ऐसा क्या है जो किसी और जानवर के लिए इतनी श्रद्धा इतना प्रेम इतना आदर नहीं। यह वीडियो देख कर हमारे विवर्स समझ पाएंगे कि क्यों भारत देश में गाय को पवित्र माना जाता है और क्यों मां का दर्जा दिया जाता है पर यह सब जानने से पहले हम स्वदेशी गाय की विशेषताओं को देखते हैं और यह जानते हैं कि यह अन्य गाय से कैसे अलग है देसी गाय की पहचान।

की पीठ पर उभरे हुए कुंवर से होती है जो अन्य नस्ल में नहीं होता। इनके कान भी अन्य गाय के मुकाबले लंबे होते हैं। देसी गाय ही एकमात्र देवी जीव है जिसकी सुरा केतु नाड़ी उसकी रीढ़ से गुजरती है। ऐसा माना जाता है कि नारी सूरज से औषधीय शहर को आकर्षित करती है। जब सूर्यकेतु नाड़ी 100 रनों के साथ संपर्क में आती है। गाय के रक्त में सोने से लवण का प्रवाह होता है। इसीलिए देसी गाय का दूध, मक्खन और घी सोने का रंग ग्रहण करता है। वैदिक गाय का गोबर पतली जल्दी से ढके होने से हमेशा एक सुखदायक गन छोड़ता है। यार देसी गाय के गोबर की गंद बहुत ही बदबूदार होती है। अन्य गाय का गोबर तरल होता है क्योंकि उनके गोबर में ठोस रखने के लिए जल्दी नहीं होती।

देसी गाय का दूध अधिकांश ए टू ग्रेट का होता है। इस दूध को alpha-2 कैसीन प्रोटीन की मात्रा में समृद्ध पौष्टिक माना जाता है जो स्वस्थ जीवन जीने के लिए उपयोगी है। यार देसी गाय के दूध में ए टू जेड एक तत्व बहुत कम पाया जा।सिर्फ दूध ही नहीं जिसके कारण गाय की समृद्धि है। गाय से प्राप्त और भी कई उत्पाद है जैसे कि गोमूत्र, गोबर और चमड़ा प्रत्येक उत्पाद सभी प्राणियों और पर्यावरण को लाभ प्रदान करते हैं। पंचगव्य शब्द का संस्कृत में अर्थ है। 5 गाय पंचगव्य की पांच मुख्य सामग्रियों में गोबर गोमूत्र दूध, दही और घी है। गाय जितना मनुष्यों से लेती है, उससे कहीं अधिक देती है। हिंदू धर्म में सभी जीवो को पवित्र बताया गया है।

मां के बाद गाय का दूध पीने से गाय के साथ मातृत्व का भाव भी जुड़ जाता है। इसलिए गाय के लिए विशेष सम्मान और श्रद्धा है। त्योहारों मेलों में गाय को सजाते हैं लेकिन जैसे देवताओं की पूजा की जाती है। गाय की पूजा नहीं होती। गाय इस पृथ्वी पर जीवन का भी प्रतीक है। पोषक और नाता है। गाय इतनी उदार है कि पानी घास और अनाज के अलावा कुछ नहीं लेती।पर मनुष्यों को बदले में कई उपहार देती है। मृत्यु के बाद भी गाय इस दुनिया को चमड़े की बेल्ट सीटें कोर्ट और जूते जैसी चीजें देती है। कई मनुष्यों के लिए गौ सेवा, अनुग्रह और बहुतायत का प्रतीक गाय की सेवा में निमृता, ग्रहण, शीलता और प्रकृति के साथ जुड़ाव के गुण विकसित होते हैं। महात्मा गांधी ने एक बार कहा था किसी भी देश की महानता और उसकी नैतिक प्रगति इस बात पर निर्भर करता है कि उस देश में जानवरों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। इसलिए गाय की सुरक्षा केवल गाय की सुरक्षा ही नहीं उन सभी लोगों की सुरक्षा है जो दुनिया में असहाय और कमजोर है। इस समय जानवर का सम्मान सभी प्राणियों का सम्मान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *