क्यों तोड़ा रावण ने शनिदेव का पैर?

शनि को धीमी चाल चलने वाला ग्रह माना जाता है। इसी धीमी चाल के कारण एक राशि पर यह करीब ढाई साल तक विराजमान रहते हैं। इसका कारण यह है कि शनि लंगड़ा कर चलते हैं जिसकी वजह से इनकी चाल बेहद धीमी है। शनिदेव की लंगड़ी और धीमी चाल का संबंध रावण के क्रोध और उसके पुत्र मेघनाथ की अल्पायु से जुड़ा हुआ है। रावण ने शनिदेव का पैर स्क्रीन पर दिख रहे हैं। सब्सक्राइब बटन पर क्लिक करें। हमारी आने वाली सभी वीडियो देखने के लिए किसी भी व्यक्ति का संपूर्ण जीवन उसकी कुंडली में बैठे ग्रहों की कठपुतली की तरह है।

ज्योतिष भाषा में कहा जाए तो जब व्यक्ति जन्म लेता है तो उस समय मौजूद ग्रह नक्षत्रों के आधार पर उसकी कुंडली का निर्धारण होता है। यही ग्रह नक्षत्र उसके आगामी जीवन को अपने अपने अनुसार प्रभावित करते हैं। लंका का राजा रावण, एक तपस्वी महा योद्धा और मायावी राजा था रावण। ज्योतिष शास्त्र का भी महान गया था था। वह भगवान शिव का परम भक्त भी था। उसने घोर तपस्या करके कई शक्तियां अर्जित की थी। रावण चाहता था कि उसका पुत्र दीर्घायु हो और कोई देवी-देवता उसके प्राण ना ले सके। इसलिए जब रावण की पत्नी मंदोदरी गर्भ से थी, तब रावण ने इच्छा जताई कि उसका होने वाला पुत्र शुभ नक्षत्रों में ही पैदा हुआ जिससे वे महा प्राथमिक कुशल योद्धा और तेजस्वी बने। बस इसी इच्छा के कारण रावण ने सभी ग्रहों को मेघनाथ के जन्म के समय शुभ और सर्वश्रेष्ठ सिटी में रहने का आदेश दिया था।

इन सभी ग्रहों में से शनि ग्रह को न्याय का देवता माना गया है। वह हर किसी के साथ न्याय करते हैं। पापियों को दंड देते हैं और पीड़ितों की रक्षा करते हैं। रावण के भाई से मेघनाथ के जन्म के वक्त शनिदेव को छोड़कर सभी ग्रह रावण की इच्छा अनुसार शुभ एवं उच्च स्थिति में विराजमान हो गए। केवल शनिदेव ही ऐसे गए थे जो रावण से जरा भी नहीं डरते थे। रावण जानता था कि शनि देवा यू।रक्षा करते हैं लेकिन मैं यह भी जानता था कि आसानी से तो शनिदेव उसकी बात मान कर शुभ स्थिति में विराजित नहीं होंगे।

इसलिए रावण ने अपने बल का प्रयोग करते हुए शनिदेव को भी ऐसी स्थिति में बांध दिया जिससे उसके होने वाले पुत्र की आयु लंबी हो सके। लेकिन शनि तो न्याय के देवता शनि देव रावण की मनचाही स्थिति में तो रहे और उन्होंने मेघनाथ के जन्म के दौरान अपनी दृष्टि बदल ली, जिसकी वजह से मेघनाथ अल्पायु हो गया। शनि की इस हरकत से रावण काफी क्रोधित हो गया और रावण ने क्रोध में आकर अपनी गदा से शनि के प्यार पर प्रहार किया। तभी से शनि देव लंगड़ा कर धीमी चाल चलते हैं। उम्मीद करते हैं दोस्तों, शनिदेव और रावण का यह प्रसंग आपको बेहद पसंद आया होगा।

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