क्यों कहा जाता है भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम

रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाए। इसमें आपका बहुत-बहुत स्वागत है। मित्रों हमने बचपन से ही अपने माता-पिता शिक्षक तथा पुस्तकों से मर्यादा पुरुषोत्तम राम के विषय में अनेकों रोचक कथा प्रेरणादायक कथाएं सुनो भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहा गया, इसकी चर्चा करेंगे। हम आज की कड़ी में दोस्तों आपसे अनुरोध है। इस वीडियो को अंत तक देखें। यदि अनुसरण किया जाए तो भगवान राम की कृति व्यवहार तथा दृढ़ता आपके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लेकर आ सकते हैं। प्रेत आयोग में अवतरित भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम ने। रावण संघार के लिए इस धरती पर जन्म लिया।

अपने माता-पिता भाइयों तथा पत्नी सीता से लेकर प्रजा तक भगवान राम ने सबको समान प्रेम दिया तथा को अपने अपरिहार्य कर्तव्य पालन से कभी विमुख नहीं हुए। मां के कई के आदेश पर 14 वर्ष के वनवास को संयम के साथ पूर्ण कर उन्होंने पिता दशरथ के वचन को निभाया। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने मर्यादा का उल्लंघन ना करते हुए माता-पिता तथा गुरु की आज्ञा का सदैव पालन किया। उनके राज्य में प्रजा सुखी तथा समृद्धि थी। जब केवट ने भगवान राम को वनवास जाते समय नदी पार कर आई थी तो केवल एक छोटी सी सहायता मात्र से ही भगवान ने उसे भवसागर से ही पार लगा दिया।

सर्वगुण संपन्न भगवान राम ने अतुल यह सामान्य होते हुए भी एक साधारण जीवन व्यतीत किया। राजा बनने पर न कोई प्रसन्नता और ना ही वनवास जाते समय कोई कष्ट।भगवान राम जिनकी केवल एक इच्छा मात्र से ही समस्त सागर सूख सकता था। मैं लोक कल्याण को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए समुद्र से मार्ग प्रदान करने की विनती की शबरी के भक्ति भाव से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे नवधा भक्ति प्रदान की। कलयुग में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों पर चलकर प्रत्येक व्यक्ति एक सुखी तथा सफल जीवन की प्राप्ति कर सकता है। दोस्तों आशा है आपको हमारा आज का एपिसोड क्यों कहा जाता है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *