कौन था वो अजगर जिससे हार गए थे महाबली भीम ?

मित्रो महाभारत को लेकर आपने बहुत सी बातें सुनी होंगी लेकिन अभी भी कुछ ऐसा है जो आपने कभी सुना नही होगा और यह बात जुडी है कुन्ती पुत्र भीमसेन से जिसे शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं। अब क्या है पूरी कथा यह जानने के लिए अंत तक बने रहें। और मित्रों, ऐसे सभी एक्सक्लूसिव वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल द डिवाइन टेल्स के मेम्बर जरूर बनें। अब जैसा कि सभी जानते हैं कि द्वापर युग में महायुद्ध कौरवों और पांडवों के बीच हुआ, जो कुल 18 दिनों तक चला। इस युद्ध की सबसे खास वजह बनी। हस्तिनापुर। महाराज धृतराष्ट्र के बड़े पुत्र दुर्योधन की पांडवों के लिए जलन और ईर्ष्या। वह हमेशा से ही अपने मामा शकुनि के साथ मिलकर पांडवों को नीचा दिखाने के लिए हर तरह की चालें चलता रहता। अब जैसा कि आप भी जानते हैं कि शकुनी और दुर्योधन की चाल की वजह से ही पांडवों को वनवास पर जाना पड़ा और इस वनवास के दौरान हुई बहुत सी घटनाओं का विवरण महाभारत में हमें पढने को मिलता है और इन्हीं में से एक रोचक कथा है जिसमें एक बार महाबलशाली कुन्ती पुत्र भीम एक अजगर से सामना करते हुए मरते मरते बचे और उनकी रक्षा के लिए बड़े भाई युधिष्ठिर को आना पड़ा। तो मित्रों, महाभारत के वनपर्व के अनुसार यह बात है उस समय की जब पांडवों के वनवास का 11वां साल लगभग समाप्त होने वाला था।

उस समय एक बार भीम वन की सुंदरता को देखने के लिए जंगल में विचरण कर रहे थे। घूमते घूमते वह अचानक एक ऐसे स्थान पर पहुंचे जहां उन्हें एक विशालकाय अजगर दिखाई दिया। वह अजगर आकार में किसी बड़े पर्वत जैसा था और अगर वह चाहता तो एक साथ 100 हाथियों को एक साथ निगल लेता क्योंकि वह बहुत ही विशालकाय और खतरनाक था। ऐसे अजगर को देख भीमसेन उसके पास गए लेकिन जैसे ही उस अजगर ने ब्रेक उधर को अपने पास खड़ा पाया वैसे ही उस भयंकर अजगर ने भीम को कसकर अपनी जकड़ में पकड़ लिया। अब वैसे तो भीम के पास भी 10,000 हाथियों के जितनी ताकत थी लेकिन उस अजगर के चंगुल में फंसते ही उनकी सारी शक्तियां समाप्त सी हो गई और वह उससे मुक्त होने के लिए छटपटाने लगे और थोड़ी ही देर बाद बेहोश भी हो गए। वहीं जब कुंती पुत्र को आश्रम लौटने में देर होने लगी तो धर्मराज युधिष्ठिर बहुत ज्यादा परेशान हो गए और फिर उन्होंने अर्जुन, नकुल व सहदेव को आश्रम में ही रहकर पांचाली द्रौपदी की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी और स्वयं ऋषि धौम्य को साथ लेकर भीमसेन को खोजने वन में चल दिए। मार्ग में जाते जाते उन्हें भीम के पैरों के निशान दिखे और वह उनका पीछा करते करते उसी जगह पर पहुँच गए जहां उसे शक्तिशाली अजगर ने भीम को जकड़ रखा था। अब भीम को इस हालत में देख बड़े भाई युधिष्ठिर बहुत दुखी हुए और उन्होंने उस अजगर से पूछा, हे अजगर!

तुम कौन हो? तुमने इस तरह मेरे छोटे भाई भीम को क्यों जकड़ रखा है? तुम अपना असली परिचय दो। क्या तुम वास्तव में अजगर हो या फिर कोई देवता या दानव? तुम मेरे भाई को छोड़ दो, मैं तुम्हें इससे भी ज्यादा स्वादिष्ट भोजन लाकर दूंगा। धर्मराज युधिष्ठिर की यह बातें सुनकर अजगर बोला, मैं वास्तव में अजगर नहीं हूं, बल्कि मेरा यह शरीर शापित है। मैं पिछले जन्म में आपका ही पूर्वज न हुआ हूं। उस समय जब मैंने तीनों लोकों पर विजय पा ली थी, तब मुझमें बहुत ज्यादा घमंड आ गया, जिसके चलते मैं किसी को भी कुछ नहीं समझता था। यहां तक कि ब्रह्मऋषि देवता, गंधर्व, यक्ष, राक्षस और नाग इन सभी को मैं अपना दास समझता था और इन सभी का बहुत अनादर करता। उसी दौरान मैंने अपने घमंड में आकर महर्षि अगस्त्य का भी अनादर कर दिया, जिस कारण उन्होंने मुझे अजगर योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। और तो और साथ ही में उन्होंने यह भी कहा था कि समय आने पर युधिष्ठिर के द्वारा ही मैं इस श्राप से स्वतंत्र हो पाऊंगा और साथ ही मुझे अपने पूर्वजन्म के बारे में सबकुछ याद रहेगा। अजगर ने आगे युधिष्ठिर से कहा कि मैं तुम्हारे साथ शास्त्रार्थ करना चाहता हूं जिससे मुझे भी यह पता चले कि असल में तुम कितने ज्ञानी हो। अगर तुमने मेरे दिए गए प्रश्नों का सही सही उत्तर दिया तो मैं तुम्हारे भाई भीम को तुरंत ही अपने चंगुल से स्वतंत्र कर दूंगा। इतना कहते ही उस अजगर ने कुंती पुत्र से पहला सवाल पूछा, हे युधिष्ठिर!

मुझे पहले यह बताओ कि आखिर ब्रह्मा ने किसे कहा जाता है? उसके भीतर ऐसे कौन से गुण होते हैं जिसके चलते किसी मनुष्य को ब्राह्मण कहा जाए? अजगर की यह बातें सुनकर युधिष्ठिर बोले हे अजगर! जो व्यक्ति स्वभाव से ही दानी हो, सच्चाई के मार्ग पर चलने वाला हो। जिसके मन में सभी के लिए दया का भाव हो और जो कभी भी किसी पर अत्याचार करने की न सोचता हो, असल में वही सच्चा ब्राह्मण है। युधिष्ठिर का यह उत्तर सुनकर अजगर संतुष्ट हुआ और उसने फिर से एक सवाल किया कि हे कुन्ती पुत्र! तुमने मेरे सवाल का बहुत ही उत्तम उत्तर दिया है, लेकिन मुझे अब यह बताओ कि ब्राह्मणों वाले ये गुण जो तुमने मुझे बताए हैं, यदि वह गुण ब्राह्मण के अलावा किसी और व्यक्ति में भी पाया जाएं तो क्या उसे भी ब्राह्मण कहा जाए? अजगर के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए युधिष्ठिर कहते हैं कि ब्राह्मणों के अलावा अगर किसी भी व्यक्ति में ब्राह्मण जैसे गुण पाए जाते हैं तो वह मन से ब्राह्मण ही कहा जाएगा, भले ही वह किसी भी जाति का हो।

लेकिन अगर स्वयं ब्राह्मण में भी ब्राह्मण वाले गुण ना हो और वह बुरी प्रवृत्ति का हो तो उसे अपने आप को ब्राह्मण कहने का कोई अधिकार नहीं। ऐसा व्यक्ति सिर्फ नाम भर का ही ब्राह्मण है। और मित्रों कुछ इसी तरह युधिष्ठिर ने अजगर के कई प्रश्नों का उत्तर बड़ी ही होशियारी से दिया जिससे वह अजगर बहुत प्रसन्न हुआ और उसने भीम को अपने चंगुल से मुक्त कर दिया और फिर थोड़ी ही देर में नहुष अजगर के उस देह को छोड़कर अपने वास्तविक रूप में आ गए और फिर स्वर्ग की ओर चले गए। तो मित्रो, कुछ इस तरह एक अजगर का शिकार बनते बनते रह गए थे महाबली भीम। अगर आपको आज की हमारी यह कथा अच्छी लगी हो तो इसे अपने मित्रों रिश्तेदारों के साथ जरूर साझा करें और इस तरह की सभी धार्मिक। हाउ के लिए जुड़े रहे द डिवाइन टेल से परिवार के साथ। तो फिलहाल आज के लिए बस इतना ही। अब इजाजत दें। आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

One comment

  1. अति सुन्दर कथा है बहुत बहुत धन्यवाद धर्म की जय हो🔔

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