कैमरे में हुऐ कैद वरना नहीं होता यकीन, असली भूत मेहंदीपुर बालाजी में

गवर्नेंस का कठिन। जग माही जो नहीं होती तात तुम पाही। इसका अर्थ है भगवान हनुमान। किसी भी असंभव कार्य को कर सकते हैं। हनुमान जी किसी भी संकट से बाहर निकाल सकते हैं और हमेशा अपने भक्तों की मदद करते हैं। तभी तो डर लगने पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। आज हम लेकर आए हैं भगवान हनुमान के एक ऐसे मंदिर का रहस्य। यहां लगती है भूत प्रेतों की क्लास और इन काली शक्तियों की क्लास कोई और नहीं बल्कि स्वयं पवनपुत्र हनुमान जो बाल अवस्था में बालाजी के रूप में यहां विराजमान हैं, लगाते हैं। आप सभी का स्वागत है द डिवाइन टेल्स पर। हमारी आनेवाली धार्मिक कहानियों के लिए स्क्रीन पर दिख रहे सब्स्क्राइब बटन पर क्लिक करें। तो आइए चलते हैं जिला दौसा, राजस्थान के श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम में।

इस मंदिर की मुख्य विशेषता है यहां पर किया जाने वाला बुरी आत्माओं का कर्मकांडी उपचार और भूत बाधा का समाधान। जो कोई पुजारी या तांत्रिक नहीं बल्कि भगवान हनुमान स्वयं करते हैं। भूत प्रेत की बाधा, पागलपन, मिर्गी, लकवा, टीवी, बांझपन या अन्य किसी भी प्रकार की कोई बीमारी क्यों ना हो, श्री बालाजी महाराज की कृपा से अतिशीघ्र दूर हो जाती है। श्री मेहंदीपुर बालाजी महाराज जी का दान बहुत ही पावन और चमत्कारिक है। कलियुग में तीन देवताओं को जागृत बताया गया है हनुमान, काल भैरव और महाकाली। कलियुग में श्री बालाजी महाराज ही प्रधान देव के रूप में सिद्ध हैं। दो पहाड़ियों के बीच बसे होने के कारण इसे मेहंदीपुर बालाजी घाटी भी कहा जाता है। हनुमान जी यहां बाल रूप में विद्यमान हैं। यहां श्री बालाजी महाराज के साथ भैरव बाबा एवं प्रेतराज सरकार साक्षात विराजमान हैं।

मैजिक मंत्र, काली जादू की गतिविधियां, बीमारियों के कर्मकांडी उपचार, बुरी आत्माएं और भूत भगाने के लिए मेंहदीपुर बालाजी मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है। वर्ष 2 हज़ार 13 में जर्मनी, नीदरलैंड्स के डॉक्टर्स के साथ एम्स और दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवी और मनोचिकित्सकों की एक टीम ने विस्तार से मंदिर की गतिविधियों का मूल्यांकन करने के लिए एक शोध अध्ययन शुरू किया। श्री बालाजी महाराज की मूर्ति के चरणों में एक कुंड है, जिसका जल कभी खत्म नहीं होता। रहस्य यह है कि श्री बालाजी महाराज के रीढ़ के पास से एक छेद से जलधारा लगातार बहती है। उसी जल से भक्तों के छींटे लगाए जाते हैं। यहां श्री बालाजी महाराज अपने भक्तों के हर संकट को दूर करते हैं। यहां जो भी भक्त सच्चे मन से अर्जी लगाते हैं, बाबा जी उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर का वातावरण बहुत ही भयावय और चीखों से भरा होता है। पीड़ित लोग चीखते चिल्लाते हुए मंदिर के अंदर पूरे वातावरण को भरते हैं।

प्रभावित समूहों में सभी उम्र के बच्चों, पुरुषों और महिलाओं का समावेश होता है। मंदिर परिसर चार कक्षों में विभाजित है। पहले दो कक्षों में भगवान हनुमान और भैरव के देवता पाए जाते हैं। आग में भक्तों को बाहर दी गई काले रंग की गेंद फेंकने को कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि देवता हनुमान किसी भी प्रकार की बुरी ताकतों से संरक्षण कर सकते हैं। कई धार्मिक और बुरी आत्माओं के भूत भगाने के अनुष्ठान मंदिर में पूरे वर्ष चलते हैं। मंदिर में भूत बाधा से परेशान लोग दीवारों और खंभों पर अपने सर पीटते नजर आते हैं। यह भी कहा जाता है कि हर दिन यहां कई बुरी आत्माओं को दंडित किया जाता है। श्री बालाजी महाराज के मंदिर की दिनचर्या प्रतिदिन सुबह 05:00 बजे मुख्य द्वार खुलने के साथ शुरू होती है। मंदिर की धुलाई, सफाई और फिर श्री बालाजी महाराज की पूजा अर्चना की जाती है। सबसे पहले श्री बालाजी महाराज का गंगाजल से अभिषेक होता है। गंगाजल से स्नान करने के बाद चोले का नंबर आता है। चोला श्री बालाजी महाराज के श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। यह सप्ताह में तीन बार सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को चढ़ाया जाता है। सिंदूर को ही सामान्य भाषा में चोला कहते हैं।

आरती का समय होते होते मंदिर के बाहर भक्तों का जन समूह एकत्रित हो जाता है। जैसे ही आरती शुरू होती है श्री बालाजी महाराज के जयकारों, घंटों और वाद्य यंत्रों की आवाजों से पूरी मेहंदीपुर घाटी गूँज उठती है। आरती लगभग 40 मिनट तक चलती है। बालाजी के साथ श्रीगणेश, श्री प्रेतराज सरकार, भैरव जी आदि का भी भोग लगता है। आरती संपन्न होते ही भक्त और भगवान का मिलन प्रारंभ हो जाता है जो रात्रि लगभग 09:00 बजे तक बिना रोके चलता रहता है। देश के दूर दूर क्षेत्रों से यहां दर्शनार्थी भक्त आते हैं। लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां बहुत भीड़ होती है। कोई भी भक्त अगर सच्चे मन और सच्ची श्रद्धा से श्री बालाजी महाराज के दरबार जाते हैं, श्री बालाजी महाराज उनको अपने दर से कभी खाली नहीं भेजते। हालांकि हम लोग भौतिक विज्ञान के युग में जी रहे हैं किन्तु श्री बालाजी के स्थान पर आकर आप सब कुछ भूल जाएंगे और तन मन से श्रीचरणों के भक्त बन जायेंगे। नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं। मेहंदीपुर धाम में श्री बालाजी महाराज जी के दर्शन हेतु जाने वाले यात्रियों एवं श्रद्धालुओं को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। मंदिर के अंदर किसी को छूने या उनसे बात करने से पहले सावधान रहें। यहाँ सभी के साथ।

स्नेहपूर्ण एवं सहानुभूति का व्यवहार रखना चाहिए। व्यर्थ का वार्तालाप नहीं करना चाहिए। जिन रोगियों को मार पड़ती हुई हो, उनके लिए आसपास की जगह खाली छोड़ देनी चाहिए। श्रदालुओं को चाहिए कि वे जब तक वहां रहें पूर्णत ब्रह्मचार्य का पालन करें तथा मांस, मदिरा, प्याज आदि का सेवन न करें। गांव में प्रवेश करने के तुरंत बाद कुछ भी खाने या पीने की सलाह नहीं दी जाती। जाने से पहले गांव में पानी की बोतलें और भोजन पैकेट पूरी तरह से खाली करके निकलें। अपने घरों के लिए मंदिर छोड़ते समय लड्डू के प्रसाद के अलावा कुछ भी ले जाना शुभ नहीं माना जाता। भक्तों ध्यान दें श्री मेहंदीपुर धाम में किसी भी पंडित या ओझा या व्यक्ति विशेष के द्वारा संकट नहीं काटा जाता बल्कि यहां संकट श्री बालाजी महाराज ही काटते हैं। मेहंदीपुर बालाजी दरबार के अंदर बालाजी महाराज का प्रसाद जो दो लड्डुओं का पैकेट होता है, प्रत्येक भक्त को श्रद्धापूर्वक दिया जाता है। यात्री उसे स्वयं ग्रहण कर घर ले जाकर परिवार में बांट सकते हैं। यहां से निकलते हुए चूंकि यह सबसे अधिक संभावना है कि कई बुरी आत्माएं आपको देख रहीं हों। याद रखें, किसी भी अजीब आवाज पर पीछे घूमकर देखने की गलती न करें। उम्मीद करते हैं दोस्तों मेहंदीपुर बालाजी के मंदिर का रहस्य जानकर आप अवश्य ही रोमांचित हुए होंगे। हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। अगर आपने अपनी जिन्दगी में भूत बाधा से पीड़ित लोगों को देखा है। वीडियो की जानकारी ज्यादा से ज्यादा शेयर करें

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