आज भी यहाँ रहते हैं श्री राम के बंशज

आज भी यहाँ रहते हैं श्री राम के बंशजराम के वंशज आज हैं जिंदा। जानिए कौन हैं वो और कहां रहते हैं। मित्रों, अयोध्या में जन्मे राम जी का इतिहास तो हममें से हर किसी को मालूम है, लेकिन शायद ही आपको मालूम हो कि सदियों बाद भी भगवान राम तो नहीं लेकिन उनके वंशज आज हमारे बीच जिन्दा हैं। पर यहां सवाल ये उठता है कि वह कौन हैं और कहां रहते हैं। दरअसल रामायण के अनुसार यह बात तो जगजाहिर है कि प्रभु श्रीराम का अपनी सौतेली मां कैकयी के वचन के कारण 14 वर्ष का वनवास काटना पड़ा था। आप यह भी जानते होंगे कि इन 14 वर्षों में प्रभु श्रीराम ने रावण का वध भी किया और अयोध्या लौटकर राजा बने।

लेकिन इसके बाद क्या हुआ कुछ शायद ही आपको पता हो। दरअसल दोस्तों रामजी के बाद उनके पुत्र लव और कुश ने इस वंश को आगे बढ़ाया था। प्रभु श्रीराम ने परलोक वासी होने से पहले पुत्र कुश को दक्षिण कोसल, कुशावती और अयोध्या राज्य सौंपा तो वहीं लव के हिस्से में पंजाब आया जिसकी राजधानी लाहौर कहलाई। कहा जाता है कि राजा लव से राघव राजपूत का जन्म हुआ जिनसे बडगूजर, जायस और सिकरवार का वंश चला। वहीं सिसोदिया राजपूत को इसकी दूसरी शाखा माना जाता है जिनमें बैसला गहलौत वंश के राजा हुए और उन्होंने युगों युगों तक अपने पूर्वज लव का प्रतिमान पढ़ाया। वहीं मित्रो दूसरी तरफ बात करें कुश वंश की तो उनके द्वारा कुशवाहा, मौर्य, सैनी, शाक्य सम्प्रदाय की स्थापना हुई। यही नहीं सूर्य वंश भी कुश का एक अंश ही है। इसके अलावा कुश की 50वीं पीढ़ी में शुल्क हुए जिन्होंने आगे चलकर महाभारत युद्ध में कौरवों का पक्ष रखा। मित्रों, मान्यता है कि कुश महाभारत काल के 2500 वर्ष से तीन हज़ार वर्ष पूर्व हुए थे।

यानि कि मित्रों आज से 6500 से 76000 साल 7000 सालों पहले जो लोग खुद को शाक्य वंशी कहते थे वह कोई और नहीं बल्कि प्रभु श्रीराम के ही वंशज हैं। मौजूदा समय में जयपुर राज घराने की महारानी पद्मिनी और उनके परिवार के लोगों को प्रभु श्रीराम के पुत्र कुश का वंशज माना जाता है, जिन्हें प्रभु श्रीराम के भी वंशज कह सकते हैं। दरअसल एक इंटरव्यू के दौरान महारानी पद्मिनी ने यह दावा किया था कि उनके पति भवानी सिंह कुश के 307 में वंशज हैं। दोस्तों इस राज घराने के इतिहास पर नजर डाली जाए तो 21 अगस्त 1912 को जन्में महाराजा मानसिंह ने तीन शादियां की थी और उनकी पहली पत्नी मरुधर कंवर से जन्मे पुत्र का नाम भवानी सिंह था। भवानी सिंह का विवाह राजकुमारी पदमनी से हुआ था। यह राज घराना अरबों खरबों की संपत्ति का मालिक है। लेकिन महाराजा भवानी सिंह और उनकी पत्नी पदमनी का कोई बेटा ना होने के कारण दोनों ने अपनी बेटी दीया के बेटों को गोद ले लिया था।

दीया के बड़े बेटे का नाम पद्मनाभ सिंह है और छोटे बेटे का नाम लक्ष्यराज सिंह है जो कि इस राज घराने के वारिस हैं। ऐसे में अयोध्या में राम मंदिर को लेकर जब अदालत में सुनवाई चली थी तब जयपुर राजघराने के पूर्व महाराजा भवानी सिंह की बेटी दीया कुमारी ने सार्वजनिक तौर पर कुछ ऐसे सबूत पेश किए जिससे यह जग जाहिर हो गया कि राजपरिवार भगवान राम के बड़े बेटे कुश की वंशावली में आते हैं। पूर्व राजकुमारी और राजस्थान के राजसमंद से मौजूदा सांसद दीया कुमारी ने इसको लेकर कई सबूत पेश किए। उन्होंने कोर्ट में एक पत्रावली दिखाई, जिसमें भगवान राम के सभी वंशजों का नाम, क्रम वर्ग दर्ज था और हैरत की बात यह थी दोस्तों कि इसी वंशावली में 289 वे वंशज में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में दीया कुमारी के पिता महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ है।

यह वही वंशावली है जिसके जड़ें इक्ष्वाकु और विवस्वान से जुड़ी हुई हैं। इसमें 62वें पायदान पर राजा दशरथ तो वहीं 63वें स्थान पर स्वयं श्री भगवान श्रीराम का नाम दर्ज है। जिससे यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि जयपुर राजघराने की राजकुमारी कोई और नहीं प्रभु श्रीराम के पुत्र कुश के कुशवाह से ताल्लुक रखती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इस वंशावली के अलावा जयपुर के सिटी पैलेस में रखे हुए नौ दस्तावेज और दो नक्शे भी साबित करते हैं कि अयोध्या के जयसिंहपुरा और राम जन्मभूमि सवाई जयसिंह द्वितीय के अधीन थी। वहीं प्रसिद्ध इतिहासकार आर नाथ की माने तो अयोध्या के राम मंदिर पर अगर किसी का हक है तो वह जयपुर के कुशवाहा वंशज हैं। वैसे मित्रों सिर्फ भगवान राम ही नहीं उनकी तरह भगवान कृष्ण और पांडवों के वंशज भी आज जीवित होने का दावा करते हैं। जिसको लेकर समय समय पर खुलासा होता ही रहता है। तो मित्रों आज के लिए बस इतना ही अगर आपको यह ब्लॉग पसंद आई है तो इसे लाइक करके शेयर करना बिलकुल ना भूलें। धन्यबाद।

3 comments

  1. पंछी सिंह मन्हास राजपूत तिसिल कस्तीगढ़ जिला डोडा जम्मू &कश्मीर says:

    मेरी आप सभी से निवेदन है कि आप अपने सनातन संस्कृति हिंदू धर्म की इतिहास और धार्मिक ग्रंथ में कितनी जानकारी रखते हैं संसार में आज के समय में भी पूरे विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या जो भी जिस जाति में आबादी है उसमें श्री राम जी के वंशज ही हैं मैं भी अपनी बात करता हूं (सूर्य वंश)(भारद्वाज गोत्र) है यह तो जम्मू कश्मीर की पूरी रियासत भरी हुई है जो की हिमाचल, प्रदेश और पंजाब में भी बहुत बोड़ी आबादी वाले क्षेत्र जहां तक की भारत की धरती पर सब से अधिक लोगों में व्ही वांसेज हैं

  2. पंछी सिंह मन्हास राजपूत तिसिल कस्तीगढ़ जिला डोडा जम्मू कश्मीर &कश्मीर says:

    आपने लिखा है कि श्री राम जी वंशज आज भी मोजोद हैं यह जानकर हैरानी हुई कि एक परिवार की फोटो कॉपी देखा कर जो पूरा राजस्थान जम्मू कश्मीर पंजाब ,हिमाचल प्रदेश और इसके बाद पूरे भारत में सबसे अधिक जनसंख्या श्री राम जी के वंशज ही हैं जिन का (सूर्य वंश) भारद्वाज गोत्र (रघु वंश) इन सब का गोत्र एक ही है मैं भी उसी वंश वा गोत्र से हूं

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